
*पर्यावरण दिवस का मुख्य एजेंडा पौधारोपण नहीं*
1972 ई में स्वीडन में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन आयोजित किया गया, इस सम्मेलन की शुरुआत तारीख 5 जून को की गई थी, जिस कारण संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में नामित किया, जो मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन का पहला दिन था, उसी दिन महासभा द्वारा पारित एक अन्य प्रस्ताव के परिणाम स्वरूप (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण संरक्षण संगठन ) यूएन0ईपी का गठन हुआ।
लेकिन इस संगठन का पहला उत्सव* केवल एक पृथ्वी* के नारों के साथ 5 जून 1973 को मनाया गया। तभी से ही यह समुद्री प्रदूषण, अधिक जनसंख्या ग्लोबल वार्मिंग, वन्य जीव अपराध, जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का एक मंच रहा है।
जरूरी नहीं की हिंदुस्तान में भी हम सिर्फ पौधा रोपण 5 जून को ही करें, क्योंकि सभी देशों में मौसम एक सा नहीं रहता, हमारे यहां पौधारोपण एवं उसे संरक्षित रखने का समय बरसात की फुहार के साथ शुरू होती है, और अत्यधिक गर्मी में पौधे लगाकर मिट्टी की नमी के अभाव में नर्सरी या किसी अन्य जगह से उखाड़ कर लाए गए पौधे को नई जगह पर लगाने से उसकी ग्रोथ की आशंका बहुत कम होती है, इसलिए पर्यावरण दिवस के दिन पौधे लगाने वालों से अनुरोध है कि पौधे ऐसी जगह पर लगाऐ जहां आप उसकी सेवा कर सके।
पौधे उस नवजात शिशु की भांति है, जिसे आप कहीं से अडॉप्ट कर लाते हैं, और अगर उसकी देखभाल, उसका संरक्षण, सही तरीके से ना हो, तो वह भी कुपोषित होकर धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।
अब आपको ही विचार करना है की क्या इस पाप की भागीदार आप जानबूझकर बनेंगे, या पेड़ पौधे संरक्षित कर जलवायु को संतुलित करने में राष्ट्रीय हित का कार्य करेंगे।



