कार्बन प्रबंधन और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सीआईआई झारखंड ने CBAM एवं कार्बन अकाउंटिंग पर कार्यशाला आयोजित की
कार्बन प्रबंधन और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सीआईआई झारखंड ने CBAM एवं कार्बन अकाउंटिंग पर कार्यशाला आयोजित की

कार्बन प्रबंधन और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सीआईआई झारखंड ने CBAM एवं कार्बन अकाउंटिंग पर कार्यशाला आयोजित की
जमशेदपुर, 9 सितंबर 2026। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) झारखंड द्वारा बुधवार को जमशेदपुर में CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) एवं Carbon Accounting विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य उद्योग जगत के पेशेवरों एवं सस्टेनेबिलिटी से जुड़े विशेषज्ञों को कार्बन उत्सर्जन, उससे जुड़े जोखिमों तथा तेजी से बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार एवं टिकाऊ व्यावसायिक प्रथाओं को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने CBAM, General GHG Accounting तथा Indian Carbon Market जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। वक्ताओं ने कार्बन फुटप्रिंट को समझने, संस्थागत प्रक्रियाओं को मजबूत करने, प्रभावी कार्बन प्रबंधन रणनीतियां अपनाने तथा व्यवसायों में सतत विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीआईआई झारखंड सस्टेनेबिलिटी पैनल के संयोजक एवं टाटा स्टील लिमिटेड के चीफ – कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी, श्री सौरभ कुंडू ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी मूल रूप से एक सोच और जीवनशैली है। उन्होंने सभी से अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे लेकिन व्यावहारिक सतत उपायों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी कोई एक बार किया जाने वाला कार्य नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है, जिसमें संगठनों को अपनी कार्यप्रणालियों का लगातार मूल्यांकन कर सुधार के अवसर तलाशने और अधिक जिम्मेदार एवं कुशल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता होती है। उन्होंने संगठनात्मक संस्कृति और रोजमर्रा के निर्णयों में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करने पर भी जोर दिया।
सीआईआई झारखंड के पूर्व चेयरमैन एवं हाईको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ, श्री तपस साहू ने कहा कि झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत उद्योगों के लिए सस्टेनेबिलिटी समान रूप से महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से छोटे उद्योगों एवं MSMEs के लिए। उन्होंने सौर ऊर्जा, ऊर्जा-कुशल तकनीकों और संसाधन-कुशल प्रक्रियाओं को अपनाने तथा परिचालन दक्षता में निरंतर सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि सतत परिवर्तन के लिए “प्रक्रिया में बदलाव से अधिक जरूरी संस्कृति में बदलाव है।” उन्होंने सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में प्रशिक्षकों की क्षमता विकसित करने और उद्योगों में जागरूकता एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों का एक मजबूत पूल तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन टाटा स्टील लिमिटेड के विशेषज्ञों श्री सिद्धार्थ सरकार, सुश्री सौमी चट्टराज एवं श्री तीर्थ प्रसाद सपकोटा ने किया। विशेषज्ञों ने CBAM, GHG Accounting और कार्बन प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अपने व्यावहारिक अनुभव एवं महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
सीआईआई झारखंड द्वारा आयोजित इस कार्यशाला ने इस बात को रेखांकित किया कि संगठनों को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित न रहते हुए सस्टेनेबिलिटी के प्रति समग्र और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। कार्यशाला में संसाधन दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, जिम्मेदार उपभोग और निरंतर सुधार जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई।
कार्यशाला ने प्रतिभागियों को सस्टेनेबिलिटी को अपनी व्यावसायिक रणनीतियों और दैनिक परिचालन में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए व्यावहारिक एवं उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान किया। इससे अधिक लचीले, संसाधन-कुशल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार औद्योगिक संगठनों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।




