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सतलुज फिल्म को ओटीटी की अनुमति दे सरकार : कुलबिंदर 

सतलुज फिल्म को ओटीटी की अनुमति दे सरकार : कुलबिंदर 

 

 

 

सतलुज फिल्म को ओटीटी की अनुमति दे सरकार : कुलबिंदर

मानवाधिकार के संघर्ष को समर्पित व्यक्तित्व है खालड़ा

जमशेदपुर ।

 

क़ौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि दलजीत सिंह दो

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सांज अभिनीत “सतलज” फिल्म को ओटीटी में प्रदर्शन की अनुमति दे। किसी संकीर्ण विचारधारा संगठन के दबाव में ओटीटी में अस्थाई प्रतिबंध लगाना कहीं से भी उचित नहीं है। पंजाब में आतंकवाद नियंत्रण के नाम पर हजारों युवकों की गैर ज्यूडिशियल हत्या से संबंधित फिल्म है। पंजाब के निडर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की सच्ची जीवनी पर आधारित है।यह फिल्म १९९० के दशक के उस दौर को उजागर करती है, जब खालड़ा ने राज्य में आतंकवाद के नाम पर हजारों लोगों की गैर-न्यायिक हत्याओं और उनके गुप्त अंतिम संस्कारों के खौफनाक सच का पर्दाफाश किया था।

मानव अधिकारों के लिए काम करने वाले भारत के प्रत्येक गैर सरकारी संगठनों और देशभक्त युवाओं के लिए प्रेरक एवं अनुकरणीय है।

अधिवक्ता के अनुसार न यह फिल्म किसी आतंकवादी को रॉबिन हुड की तरह पेश नहीं करती है ना ही किसी राजनीतिक, सामाजिक अथवा धार्मिक विचारधारा को प्रोत्साहित अथवा उस पर चोट करती है।

बैंक मैनेजर खालड़ा ने अपनी जान को भारी जोखिम में डालकर राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों की ज्यादतियों के खिलाफ राज्य, राष्ट्र एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मुखर हुए। सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज और प्रतीक बने और इसके लिए जान देनी पड़ी। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया। देश के न्यायपालिका और सीबीआई की सार्थक भूमिका और संदेश भी इस फिल्म में है, जो भ्रष्ट सिस्टम से लड़ने की ताकत हर भारतीय नागरिक को देता है।

कुलबिंदर सिंह के अनुसार वर्तमान सरकार पंजाब के उस काले दौर के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराती रही है फिर वास्तविक इतिहास को परोसे जाने पर उसे परेशानी क्यों है।

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